इरेक्टाइल डिसफंक्शन (Erectile Dysfunction) यानी यौन संबंध के दौरान पर्याप्त इरेक्शन बनाए रखने में असमर्थता, पुरुषों में एक आम लेकिन संवेदनशील स्वास्थ्य समस्या है। यह केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक जीवन को प्रभावित करती है। समय पर पहचान, कारण की जांच और उचित इलाज से इसे पूरी तरह नियंत्रित कर सकते हैं।
दुनियाभर में लाखों पुरुष इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन सामाजिक झिझक और शर्मिंदगी के कारण अधिकतर लोग डॉक्टर से खुलकर बात नहीं कर पाते। यही वजह है कि कई बार यह समस्या लंबे समय तक अनदेखी रह जाती है और धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह स्थिति उम्र से जुड़ी कोई “सामान्य” समस्या नहीं है, बल्कि एक उपचार योग्य स्वास्थ्य स्थिति है। सही समय पर पहचान, कारण की सटीक जांच और नोएडा के अच्छे यूरोलॉजी हॉस्पिटल के विशेषज्ञ द्वारा सुझाए गए इलाज से इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। आधुनिक चिकित्सा में दवाइयों, काउंसलिंग, जीवनशैली में बदलाव और एडवांस्ड ट्रीटमेंट विकल्प मौजूद हैं, जो पुरुषों को फिर से स्वस्थ और संतुलित यौन जीवन जीने में मदद करते हैं।
पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन क्यों होता है? (Why Erectile Dysfunction Happens?)
इरेक्शन एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, जो यौन उत्तेजना के दौरान शुरू होती है। इस समय लिंग की रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं और उनमें रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे लिंग कठोर और सीधा हो जाता है। यह स्थिति यौन संबंध के लिए आवश्यक होती है, लेकिन अगर किसी कारणवश रक्त प्रवाह बाधित हो जाए, जैसे धमनियों का संकरा होना, नसों में क्षति, हार्मोनल असंतुलन या मानसिक तनाव, तो इरेक्शन या तो नहीं हो पाता या लंबे समय तक टिक नहीं पाता।
यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि इस समय रक्त वाहिकाओं की लचीलापन और हार्मोन स्तर में बदलाव आता है। हालांकि, इरेक्टाइल डिसफंक्शन केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है; यह किसी भी उम्र के पुरुषों में हो सकता है, खासकर अगर वे अस्वस्थ जीवनशैली, धूम्रपान, शराब, डायबिटीज (diabetes) या उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं से ग्रस्त हों। समय पर पहचान और उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन के कारण (Causes of Erectile Dysfunction)
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के कारण कई प्रकार के होते हैं।
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के कारण में शारीरिक, मानसिक और जीवनशैली से जुड़े कारण शामिल हैं। शारीरिक कारणों में सबसे ज्यादा ब्लड फ्लो की समस्या शामिल है। हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी बीमारियों के कारण लिंग में रक्त का प्रवाह कम होता है। जिससे इरेक्शन प्रभावित होता है।
हार्मोनल असंतुलन जैसे टेस्टोस्टेरोन का कम स्तर या थायरॉइड विकार समस्या को बढ़ाते हैं। कभी-कभी न्यूरोलॉजिकल कारण जैसे स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, पार्किंसंस डिजीज (Parkinson's Disease) या मल्टीपल स्क्लेरोसिस भी इरेक्टाइल डिसफंक्शन का कारण बनते हैं।
कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट जैसे ब्लड प्रेशर की दवाएं, डिप्रेशन की दवाएं या एलर्जी की दवाएं करण बनती हैं।
मनोवैज्ञानिक कारणों में तनाव, चिंता और डिप्रेशन प्रमुख है। जो यौन इच्छाशक्ति और इरेक्शन को प्रभावित करते हैं। रिश्तों में तनाव या असंतोष भी इस समस्या को बढ़ाता है।
लाइफस्टाइल कारणों में धूम्रपान, शराब और नशीले पदार्थों का सेवन सबसे ज्यादा हानिकारक होता है। मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी भी रक्त प्रवाह को प्रभावित कर इरेक्शन को कारण बनते है।
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लक्षण (Symptoms of Erectile Dysfunction)
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लक्षण कई तरह से प्रकट होते हैं।
सबसे आम समस्या यह होती है कि यौन उत्तेजना के बावजूद लिंग में इरेक्शन नहीं होता या कमजोर इरेक्शन होता है।
कई बार इरेक्शन शुरू तो होता है, लेकिन वह पर्याप्त समय तक टिकता नहीं। जिससे यौन संबंध पूरा करना मुश्किल होता है।
पुरुषों में यौन इच्छा या कामेच्छा में भी कमी महसूस होती है। जिससे सेक्स के प्रति रुचि कम होती है। यह स्थिति न सिर्फ शारीरिक बल्कि
मानसिक रूप से प्रभावित करती है। जिससे आत्मविश्वास में कमी आती है। यौन संतुष्टि कम होती है।
इस वजह से व्यक्ति में तनाव और चिंता भी बढ़ती है, जो समस्या को और बढ़ाती है।
इरेक्टाइल डिसफंक्शन टेस्ट (Tests for Erectile Dysfunction)
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के सही निदान के लिए यूरोलॉजिस्ट कई तरह के टेस्ट कराते हैं। सबसे पहले ब्लड टेस्ट करते है। जिसमें हार्मोन स्तर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की जांच शामिल होती है। इससे शरीर में हार्मोनल असंतुलन या मेटाबोलिक (Metabolic) समस्याओं का पता चलता है। यूरिन टेस्ट भी किया जाता है, जो डायबिटीज या अन्य मेटाबॉलिक विकारों की जानकारी देता है।
लिंग में रक्त प्रवाह की स्थिति को समझने के लिए डुप्लेक्स अल्ट्रासाउंड (Duplex Ultrasound) किया जाता है, जो यह बताता है कि रक्त सही मात्रा में पहुंच रहा है या नहीं। रात के समय इरेक्शन टेस्ट (एनपीटी) भी लिया जाता है। जिससे यह पता चलता है कि नींद के दौरान इरेक्शन होता है या नहीं। जिससे शारीरिक और मानसिक कारणों में अंतर का पता लगे। अअगर आवश्यक हो तो तनाव, चिंता या अन्य मानसिक कारणों की जांच के लिए साइकोलॉजिकल इवैल्यूएशन करते हैं।
इरेक्टाइल डिसफंक्शन पर यूरोलॉजी गाइडलाइन (Urology Guidelines on Erectile Dysfunction)
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के इलाज में कई विकल्प उपलब्ध हैं। जिन्हें मरीज की स्थिति और कारण के अनुसार चुना जाता है। दवा-आधारित इलाज में सबसे आम फॉस्फोडाईस्टेरेज टाइप 5 इनहिबिटर्स जैसे सिल्डेनाफिल और टैडालाफिल शामिल हैं। जो लिंग में रक्त प्रवाह बढ़ाकर इरेक्शन को बेहतर बनाते हैं।
अगर टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो तो हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी देते हैं। मेडिकल डिवाइस जैसे वैक्यूम पंप का उपयोग करते हैं। जो लिंग में रक्त खींचकर इरेक्शन उत्पन्न करता है। कुछ मामलों में इंजेक्शन थेरेपी का विकल्प है। जिसमें लिंग में विशेष दवा का इंजेक्शन देकर इरेक्शन प्राप्त किया जाता है।
गंभीर और जटिल मामलों में सर्जिकल विकल्प जैसे पेनाइल इम्प्लांट (Penile Implant) को अपनाते हैं। जो स्थायी समाधान प्रदान करता है। इलाज के साथ-साथ लाइफस्टाइल सुधार बेहद जरूरी होता है। नियमित व्यायाम करना, वजन को नियंत्रित रखना, धूम्रपान और शराब से परहेज करना। तनाव को कम करना और नींद का सही संतुलन बनाए रखना इरेक्टाइल डिसफंक्शन को नियंत्रित करने में मदद करता है। इन सभी उपायों से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
इरेक्टाइल डिसफंक्शन एक आम लेकिन पूरी तरह से इलाज योग्य समस्या है। इससे जूझ रहे पुरुषों को असहज महसूस करने की जरूरत नहीं है। सही कारण की पहचान और समय पर यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेने से न केवल उनकी शारीरिक सेहत सुधरती है। बल्कि वैवाहिक संबंध बेहतर होते हैं। अक्सर लोग इस विषय पर खुलकर बात करने से कतराते हैं। जिससे समस्या बढ़ती है। इसलिए शर्म या झिझक छोड़कर अपनी समस्या को स्वीकार करना इलाज शुरू करना जरूरी है। इससे न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक राहत मिलती है। पुरुष एक संतुष्ट एवं स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
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