कान शरीर का संवेदनशील अंग है। जब इसमें दर्द होता है तो सहनीय लगता है साथ ही सुनने की क्षमता और दैनिक जीवन को प्रभावित होती है। कान का दर्द (Ear Pain/Otalgia) बच्चों और बड़ों दोनों में होता है। इसके कारण साधारण कान का मैल जमा होना से लेकर कान का संक्रमण, ईयर ड्रम में चोट या गले की समस्या तक होते हैं। समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर कान में स्थायी नुकसान होता है।
अगर कान में लगातार दर्द, बहाव या सुनने में कमी हो रही हो तो नोएडा के अनुभवी ईएनटी (कान-नाक-गला) विशेषज्ञ (Experienced ENT specialist in Noida) से तुरंत परामर्श लेना चाहिए।
कान में दर्द क्यों होता है? (Kaan me dard kyon hota hai in Hinid)
कान का दर्द आम समस्या है। लेकिन इसके पीछे कई कारण होते हैं। यह दर्द तब होता है जब कान के अंदर सूजन, संक्रमण, मैल का जमना, प्रेशर में अचानक बदलाव या फिर किसी तरह की चोट लगती है। कई बार कान का दर्द सीधे तौर पर कान से जुड़ा हुआ नहीं होता। बल्कि दांतों की समस्या, गले की सूजन, या जबड़े की परेशानी के कारण भी महसूस होता है। अगर कान में लगातार दर्द बना रहे या कान से तरल पदार्थ निकलने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
कान में दर्द के संकेत (Kaan me dard ke sanket in Hinid)
- कान में तेज या हल्का दर्द महसूस होना
- कान से पानी, पस या खून निकलना
- सुनने की क्षमता कम होना या गूंजना
- कान में भारीपन या दबाव महसूस होना
- चक्कर आना या सिरदर्द (Headache)
- बच्चों में बार-बार रोना और कान को पकड़ना
कान में दर्द के कारण (Kaan me dard ke karan in Hinid)
कान का संक्रमणः (Ear Infection)
मध्य कान का संक्रमण:
यह सबसे आम कारण है। इसमें कान के अंदर तरल पदार्थ जमा होता है। जिससे बुखार, कान में तेज दर्द और सुनने में कमी होती है। अगर समय पर इलाज न हो तो यह पुराना संक्रमण बनता है।
स्विमरस ईयर:
यह कान की बाहरी नली का संक्रमण है। जो अक्सर तैराकी या कान में नमी रहने से होता है। इसमें कान लाल, सूजा हुआ और स्पर्श करने पर दर्दनाक होता है। कभी-कभी कान से पस या पानी भी निकलता है।
कान का मैल जमा होनाः
कान में मैल का अधिक जमाव कान की नली को ब्लॉक करता है। जिससे दबाव और दर्द महसूस होता है।
कभी-कभी सुनने में कमी, कान बंद होने का एहसास और सिर भारी लगने जैसी समस्या होती है।
सर्दी-जुकाम या गले की समस्याः
नाक और कान को जोड़ने वाली यूस्टेशियन ट्यूब बंद होने पर कान में प्रेशर बढ़ता है। यह स्थिति खासकर बच्चों में सामान्य जुकाम, एलर्जी या गले की सूजन के समय ज्यादा देखने को मिलती है। परिणामस्वरूप कान में दर्द, बंद होने का अहसास होता है।
चोट या ईयर ड्रम फटनाः
कान पर चोट लगने, बहुत तेज आवाज (लाउड म्यूजिक या विस्फोट) सुनने या फ्लाइट/स्कूबा डाइविंग जैसी स्थिति में अचानक दबाव बदलने से ईयर ड्रम फटता है। अचानक तेज दर्द, कान से खून या तरल का निकलना और सुनने की क्षमता में कमी इसके लक्षण है।
दांत या जबड़े की समस्याः
कई बार कान का दर्द सीधे कान से जुड़ा न होकर दांतों की समस्या (कैविटी) या मसूड़ों की सूजन से होता है। जबड़े के जोड़ में समस्या होने पर कान में दर्द और भारीपन होता है।
अन्य कारणः
टॉन्सिलाइटिस (Tonsillitis): गले के टॉन्सिल्स में सूजन होने पर दर्द कान तक फैलता है।
साइनस इंफेक्शन: नाक और गाल की हड्डियों में साइनस की सूजन से कान में दबाव और दर्द होता है।
एलर्जी या ठंडी हवा लगना: ठंडी हवा, धूल या एलर्जी के कारण कान की नली में जलन और दर्द होता है।
कान में दर्द की जांच (Diagnosis of Ear Pain)
क्लिनिकल एग्जामिनेशनः
डॉक्टर कान की नली और कान के परदे (ईयर ड्रम) को टॉर्च या ओटोस्कोप से ध्यानपूर्वक देखते हैं। इससे यह पता चलता है कि कान में सूजन है या नहीं, ईयर ड्रम लाल या फूला हुआ है या फिर उसमें छेद है। इससे बाहरी और मध्य कान के संक्रमण को पहचानने में मदद मिलती है।
श्रवण परीक्षणः
इसमें मरीज की सुनने की क्षमता को मापा जाता है। हेडफोन या मशीन के जरिए अलग-अलग ध्वनियों को सुनाकर यह देखते हैं कि कान कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं। यह जांच खासकर बार-बार कान के संक्रमण या ईयर ड्रम फटने की स्थिति में जरूरी होती है।
ईयर कल्चर टेस्टः
अगर कान से पानी, पस या तरल पदार्थ निकल रहा है तो उसका सैंपल लेकर प्रयोगशाला में जांच होती है। इससे यह पता चलता है कि संक्रमण बैक्टीरिया, वायरस या फंगस की वजह से है। सही कारण पता चलने पर डॉक्टर सही एंटीबायोटिक या एंटी-फंगल दवा दे पाते हैं।
इमेजिंग (सीटी स्कैन / एमआरआई)
यह जांच लंबे समय से चले आ रहे कान के संक्रमण के मामलों में की जाती है। सीटी स्कैन (CT scan) से कान की हड्डियों और मध्य कान की संरचना देखते हैं। एमआरआई (MRI) से यह पता लगाया जा सकता है कि कहीं संक्रमण मस्तिष्क या आसपास की नसों तक तो नहीं फैला है।

कान में दर्द का इलाज ईएनटी गाइडलाइन (Treatment as per ENT Guidelines)
संक्रमण के अनुसार दवाएंः
बैक्टीरियल संक्रमणः (Bacterial Infections)
डॉक्टर एंटीबायोटिक टैबलेट या ईयर ड्रॉप देते हैं। यह दवाएं बैक्टीरिया को खत्म करके संक्रमण को नियंत्रित करती हैं।
फंगल संक्रमण: (Fungal Infections)
अगर कारण फंगस है, तो एंटी-फंगल ईयर ड्रॉप का इस्तेमाल होता है। इस दौरान कान को सूखा रखना बेहद जरूरी है।
दर्द और सूजन के लिए:
दर्द कम करने के लिए पेन रिलीवर जैसे पैरासिटामोल, आइबुप्रोफेन और एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं दी जाती हैं। यह सूजन घटाकर राहत देती हैं।
कान का मैल हटानाः
अगर कान का दर्द मैल जमने की वजह से है तो डॉक्टर सिरिंजिंग या सक्शन से मैल निकालते हैं। ध्यान रहे खुद से कॉटन बड या नुकीली चीज से कान साफ करना खतरनाक होता है। इससे ईयर ड्रम फटने का खतरा होता है। कोई भी खतरनाक कदम उठाते हुए समय रहते अच्छे ईएनटी हॉस्पिटल (Best ENT Hospital in Noida) से आवश्य संपर्क करें।
गंभीर मामलों में सर्जरीः
ईयर ड्रम रिपेयर:
अगर ईयर ड्रम फट गया हो और खुद से न जुड़ रहा हो तो इस सर्जरी से उसका रिपेयर किया जाता है।
टॉन्सिल/एडेनॉइड सर्जरी: (Tonsil/Adenoid Surgery)
जिनको बार-बार गले या कान का संक्रमण होता है। उनमें टॉन्सिल या एडेनॉइड (Adenoids) हटाने की सर्जरी की जाती है।
विशेष इलाजः
बार-बार मिडिल ईयर इंफेक्शन में ईएनटी स्पेशलिस्ट (ENT Specialist) की निगरानी में दवा देते है। कई बार बच्चों के कान में छोटी ट्यूब डाली जाती है। जिससे तरल पदार्थ जमा न हो और संक्रमण बार-बार न हो।
कान में दर्द से बचाव और उपचार (Kaan me dard se bachav aur upchar in Hindi)
कान में नुकीली चीज न डालेंः
कॉटन बड, पिन, माचिस की तीली या किसी भी नुकीली चीज से कान साफ करने की कोशिश नहीं करें। इससे ईयर ड्रम फट सकता है या कान की नली में चोट लगती है। कान का मैल साफ करवाने के लिए हमेशा डॉक्टर की मदद लें।
ठंडी हवा और धूल से बचाएं
कान संवेदनशील होते हैं। इसलिए उन्हें ठंडी हवा, धूल और गंदगी से बचाना जरूरी है। सर्दी या संक्रमण के मौसम में बच्चों को टोपी या कान ढकने वाले कपड़े पहनाएं।
तैराकी के समय सावधानी बरतेंः
स्विमिंग करते समय कान में पानी न जाए, इसके लिए ईयर प्लग (Ear Plugs) का इस्तेमाल करें। कान में पानी जाने से अक्सर स्विमर’स ईयर का खतरा बढ़ता है।
सर्दी-जुकाम का सही इलाज कराएंः
साधारण सर्दी-जुकाम या गले की सूजन को नजरअंदाज न करें। अगर समय पर इलाज न हो तो यह संक्रमण कान तक पहुँच सकता है और कान में दर्द या इंफेक्शन कर सकता है।
बच्चों को दूध पिलाने का सही तरीका अपनाएंः
छोटे बच्चों को बोतल से दूध पिलाते समय लेटाकर न पिलाएं। लेटाकर दूध पिलाने से दूधयूस्टेशियन ट्यूब में जाता है। मिडिल ईयर इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।
भाप लेने से राहतः
अगर कान का दर्द सर्दी-जुकाम की वजह से है तो गरम पानी की भाप लेना फायदेमंद होता है। भाप से नाक और कान के रास्ते खुले रहते हैं। प्रेशर कम होता है।
लंबे समय तक दर्दः
अगर कान से लगातार पस या तरल पदार्थ निकल रहा है। दर्द लंबे समय तक बना है तो इसे हल्के में नहीं लें। तुरंत ईएनटी स्पेशलिस्ट को दिखाएं। जिससे समस्या गंभीर न हो और सुनने की क्षमता प्रभावित न हो।
निष्कर्ष (Conclusion)
कान में दर्द एक साधारण समस्या लगती है। लेकिन यह गंभीर बीमारी का संकेत है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। बच्चों और बड़ों दोनों को कान की सफाई, संक्रमण से बचाव और समय पर इलाज पर ध्यान देना चाहिए। अगर कान से बार-बार पस निकल रहा हो, दर्द बना रहे या सुनने में कमी हो, तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श (Consult an ENT specialist) करें। समय रहते पहचान से इलाज संभव होता है। ज्यादा देरी पर नुकसान हो सकता है।
Source: https://www.felixhospital.com/blogs/ent/kaan-me-dard-ke-karan-aur-ilaj-in-hindi
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